॥ मंत्र एवं आरती ॥

॥ मंत्र एवं आरती ॥

महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र

महिषासुर मर्दिनी स्तोत्र, जिसे अयि गिरि-नन्दिनि स्त्रोत भी कहा जाता है इसकी रचना आदि शंकराचार्य ने किया था। इसकी रचना
भगवान् विष्णु के द्वारा किये जाने का भी वर्णन मिलता ह। कहा जाता है की जब देवी दुर्गा ने महिसासुर की संहार किया था तब भगवन से स्वयं भगवती की इस स्त्रोत से स्तुति की थी।

श्री मधुराष्टकम् . Sri-Krishna-Charitra
॥ मंत्र एवं आरती ॥

श्री मधुराष्टकम्

श्री मधुराष्टकम् स्त्रोत अखण्ड भूमण्डलाचार्य जगद्गुरु महाप्रभु श्रीमद वल्लभाचार्य जी द्वारा रचित है। संस्‍कृत में होने के बावजूद यह स्त्रोत गाने और समझने में एकदम आसान है। इसमें भगवन श्री कृष्‍ण और उनकी मनोहारी लीलाओं का वर्णन किया गया है।

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