॥ मंत्र एवं आरती ॥

nirvana shatakam
॥ धर्म चर्चा ॥, ॥ मंत्र एवं आरती ॥

निर्वाण षट्कम्: शुद्ध आत्मा की पुकार

“निर्वाण षट्कम्” (Nirvana Shatakam), जिसे “आत्म षट्कम्” भी कहा जाता है, महान अद्वैत वेदांत गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक अत्यंत गूढ़ और आध्यात्मिक ग्रंथ है। इस रचना में आत्मा और ब्रह्म के अद्वैत स्वरूप का वर्णन किया गया है। यह केवल छह श्लोकों की छोटी-सी कविता है, लेकिन इसकी गहराई में सम्पूर्ण वेदांत समाया हुआ है।

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श्री शिवानन्द लहरी

शिवानन्दलहरी आदि शंकराचार्य द्वारा विरचित शिव-स्तोत्र है। इसमें विभिन्न छन्दों के सौ श्लोक हैं। इसकी रचना आदि शंकर ने तब की थी जब वे श्रीशैलम में निवास कर रहे थे। यह मल्लिकार्जुन और भ्रमराम्बिका की स्तुति से आरम्भ होता है जो श्रीशैलम के अराध्य देवता हैं।

Lord-Hanuman Bajrang Baan
॥ मंत्र एवं आरती ॥

बजरंग बाण: पाठ करने से हर बाधा का अचूक निवारण होता है

माना जाता है कि श्री हनुमान जी अकेले एकमात्र देवता ऐसे देवता हैं कि जिनके पूजन कलियुग में तुरंत फल

रामायणजी की आरती
॥ मंत्र एवं आरती ॥, ॥ श्री रामचरितमानस ॥

रामायणजी की आरती

आरती श्रीरामायणजी की। कीरति कलित ललित सिय पी की।। गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद। बालमीक बिग्यान बिसारद।। सुक सनकादि सेष अरु

Bhagvati-strot
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श्री भगवती स्तोत्रम्

माँ भगवती का यह सुन्दर “श्रीभगवती स्तोत्र”  का रोज पाठ करने वाले के ऊपर भगवती सदा ही प्रसन्न रहती हैं।  व्यास मुनि द्वारा रचित  जय भगवति देवि नमो वरदे, जयपापविनाशिनी बहुफलदे  स्त्रोत  

YouTube ॐ नमो : भगवते वासुदेवाय नमः
॥ मंत्र एवं आरती ॥

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः | हरिनाम माला स्त्रोत

ॐ नमो भगवते वासुदेवाय नमः , यह श्री भगवान विष्णु और श्रीकृष्ण दोनों का मंत्र है। इसमें दो परंपराएं हैं

॥ मंत्र एवं आरती ॥

दुर्गा चालीसा और अर्थ

नवरात्रो में माँ भगवती की पूजा की जाती है। माता की कृपा अपने परिवार पर सदैव बनाये रखने के लिए तथा माता को जल्द प्रसन्न करने के लिए रोज दुर्गा चालीसा का पाठ करना चाहिए। यूँ तो हमें नित्य पूजा में दुर्गा चालीसा का पाठ, प्रतिदिन ही करना चाहिए, लेकिन चैत्र एवं शारदीय नवरात्र में तो यथा संभव दुर्गा चालीसा का पाठ करना ही चाहिए।

Laxmi Ji
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श्री अष्टलक्ष्मी स्तोत्र

नारायण लक्ष्य है और लक्ष्मी जी उन तक पहुँचने का एक साधन। देवी शक्ति के आठ रूपों की पूजा के बहुत ही सकारात्मक परिणाम मिलता है। ये अष्ट लक्ष्मी है १.आदि लक्ष्मी, २.धन लक्ष्मी, ३. विद्या लक्ष्मी, ४. धान्य लक्ष्मी, ५. धैर्य लक्ष्मी, ६. संतान लक्ष्मी, ७. विजय लक्ष्मी एवं ८. राज लक्ष्मी या गज लक्ष्मी। अष्टलक्ष्मी स्तोत्र की रचना १९७० के आसपास दक्षिण भारत के Sri U. Ve. Vidvan Mukkur Srinivasavaradacariyar Svamikal ने किया था ।

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