॥ व्रत एवं त्योहार ॥

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हिन्दू कैलेंडर २०२२ : व्रत एवं त्यौहार की सूचि

हमारा सनातन धर्म विविधता से परिपूर्ण है। ये वास्तव में एक जीवन पद्धति है। हर साल होने वाले तीज, त्यौहार, […]

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बसंत पंचमी में सरस्वती पूजा कैसे करें

हिंदू पंचांग के अनुसार इस बार माघ शुक्ल पंचमी तिथि मंगलवार, 16 फरवरी को है। इस तिथि को शास्त्रों में बसंत पंचमी कहा गया है। इस दिन मां सरस्वती की पूजा की जाती है। इस वर्ष 29 जनवरी को ही माघ महीना आरंभ हो गया था। 16 की सुबह 3:36 पर पंचमी तिथि का आरंभ हो रहा है जो 17 फरवरी की सुबह 5:46 तक रहेगा।

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नवरात्रि की महाष्टमी पर हम कन्या पूजन क्यों करते हैं ?

नवरात्र के दौरान कन्या पूजन का विशेष महत्व है। नवरात्र की सप्‍तमी से कन्‍या पूजन शुरू हो जाता है। सप्तमी, अष्टमी और नवमी के दिन इन कन्याओं को नौ देवी का रूप मानकर पूजा जाता है।

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विश्वकर्मा पूजा – तिथि और पूजन विधि

चतुर्दशी तिथि आरंभ (15 सितंबर)- 11 बजकर 1 मिनट से।
चतुर्दशी तिथि समाप्त (16 सितंबर)- 7 बजकर 56 मिनट तक।
पूजा का शुभ मुहूर्त- 16 सितंबर- सुबह 10 बजकर 9 मिनट से 11 बजकर 37 मिनट तक।

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जितिया या जीवित्पुत्रिका व्रत

इस दिन माताएं अपनी संतान को कष्टों से बचाने और लंबी आयु की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। जीवित्पुत्रिका व्रत को कुछ जगहों पर जितिया या जिउतिया व्रत के नाम से भी जानते हैं।

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अनंत चतुर्दशी और अनंत पूजा

अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना होती है। भादो महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चततुर्दशी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और अनंत सूत्र बांधने से सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है।

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पोला पर्व: बैलों की पूजा का दिन

भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला यह पोला त्योहार, खरीफ फसल के द्वितीय चरण का कार्य (निंदाई गुड़ाई) पूरा हो जाने म नाते हैं। फसलों के बढ़ने की खुशी में किसानों द्वारा बैलों की पूजन कर कृतज्ञता दर्शाने के लिए भी यह पर्व मनाया जाता है।

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