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lord-Ram
॥ धर्म चर्चा ॥

मूर्ति, प्रतिमा या विग्रह? जानिए देवी-देवताओं से जुड़ी मंदिर वास्तु और विज्ञान की गहराई

हमारे मंदिरों में जो दिव्य स्वरूप विराजमान हैं — उन्हें कभी मूर्ति, कभी प्रतिमा, तो कभी विग्रह कहा जाता है। लेकिन क्या ये तीनों शब्द एक ही चीज़ के लिए हैं?

उत्तर है — नहीं।

इनके पीछे गहरे दार्शनिक, धार्मिक और वैज्ञानिक अर्थ छिपे हैं, जिन्हें समझना भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की यात्रा जैसा है।

Jagannath Ji Has Big Eyes
॥ कथा संग्रह ॥

जगन्नाथ जी की आँखें बड़ी क्यों हैं? एक दिव्य प्रेमगाथा

भगवान श्रीजगन्नाथ जी की आँखें सामान्य नहीं हैं — वे बड़ी, गोल और विस्फारित हैं। पर क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इन बड़ी आँखों के पीछे क्या रहस्य है?

यह केवल एक मूर्ति की विशेषता नहीं, बल्कि एक अद्भुत प्रेम कथा है जो भगवान श्रीकृष्ण, गोपियों और निष्काम भक्ति की चरम अवस्था से जुड़ी है।

॥ धर्म चर्चा ॥

उनचास मरुत: सुंदरकांड में छिपा वह रहस्य जिससे आज का विज्ञान भी अनभिज्ञ है

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के सुंदरकांड के 25वें दोहे में एक गूढ़ रहस्य छिपा है, जिसे जानकर न सिर्फ आध्यात्मिक जिज्ञासा शांत होती है, बल्कि आधुनिक मौसम विज्ञान भी हैरान रह सकता है।

Hanuman Ji
॥ धर्म चर्चा ॥

हनुमान जी की मूर्ति पर आखिर क्यों लगाते हैं सिंदूर

लाल देह लाली लसे अरुधर लाल लंगूर।
बज्र देव दांव दलन जय जय जय कपिसूर।।

अर्थ- लाल रंग का सिंदूर लगाते हैं, देह जिनकी लाल हैं और लंबी सी पूंछ हैं। वज्र के समान बलवान शरीर हैं जो राक्षसों का संहार करते हैं। ऐसे श्री कपि को बार-बार प्रणाम।

नारद जी और हनुमान जी
॥ कथा संग्रह ॥

नारद जी और हनुमान जी का प्रसंग

यह कहानी भगवान श्रीहरि और उनके अनन्य भक्तों नारद मुनि और हनुमान जी के बीच के संवाद को दर्शाती है। यह कथा इस बात पर प्रकाश डालती है कि भगवान भक्तों की सच्ची भक्ति को किस प्रकार देखते और उसका आदर करते हैं। नारद जी के अभिमान को तोड़ते हुए प्रभु यह संदेश देते हैं कि सच्चे भक्त वही हैं जो स्वयं को प्रभु के चरणों में समर्पित कर देते हैं।

महाकुम्भ मेला
॥ धर्म परिक्रमा ॥, ॥ विविध ॥

क्यों विशेष है प्रयाग में होने वाला महाकुम्भ?

इस साल महाकुंभ मेला प्रयागराज में 13 जनवरी से शुरू होगा और 26 फरवरी को महाशिवरात्रि के दिन समाप्त होगा इस बार का कुम्भ बहुत ही विशेष है। वैसे तो कुम्भ का आयोजन हर १२ वर्ष के बाद प्रयागराज में संगम तट पर होता है। लेकिन इस बार का कुम्भ सामान्य कुम्भ नहीं है। इस बार का कुम्भ महाकुम्भ है जो १४४ वर्षो में एक बार आयोजित किया जाता है। महाकुंभ केवल एक धार्मिक आयोजन नहीं है। यह आस्था, संस्कृति और परंपरा का संगम है। यहां लाखों लोग पवित्र नदियों में स्नान करने आते हैं। मान्यता है कि इससे उनके पाप धुल जाते हैं और जीवन में सफलता मिलती है।

भगवाव शिव
॥ विविध ॥

इश्वर की खोज

हृदय रूपी मंदिर में बैठे हुए ईश्वर को देखने के लिए मन रूपी द्वार का बंद होना अति आवश्यक है, क्योंकि मन रूपी द्वार संसार की तरफ़ खुला हुआ है और हृदय रूपी मंदिर की ओर बंद है।

नारद
॥ कथा संग्रह ॥

नारायण नारायण !

जब भगवन विष्णु ने नारद मुनि को सिखाया की मनुष्य का भाग्य केवल प्रारब्ध से निर्मित नहीं होता, अपितु सद्कर्म और आशीर्वाद से भी प्रभावित होता है।

Ganesh JI
॥ धर्म चर्चा ॥

सर्वप्रथम गणेशजी की ही पूजा क्यों की जाती है ?

हिंदी में एक मुहावरा है: श्री गणेश करना जिसका अर्थ है किसी भी कार्य का शुभारम्भ। तो आइये फिर जानते हैं की क्या कारण है की ब्रह्मा, शिव, विष्णु और अन्य कई दिग्गज भगवानों की बजाय सर्वप्रथम पूजा गणपति की ही क्यों होती है।

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