श्री सिद्धिविनायक गणपति मंदिर
भगवान गणेश की मूर्ति में सूंड बायीं तरफ रहती है, लेकिन सिद्धिविनायक गणेश जी की मूर्ति में सूड़ दाईं तरफ मुड़ी होती है। इस रूप को सिद्धपीठ माना जाता है और इस मंदिर को सिद्धिविनायक मंदिर कहा जाता है।
भगवान गणेश की मूर्ति में सूंड बायीं तरफ रहती है, लेकिन सिद्धिविनायक गणेश जी की मूर्ति में सूड़ दाईं तरफ मुड़ी होती है। इस रूप को सिद्धपीठ माना जाता है और इस मंदिर को सिद्धिविनायक मंदिर कहा जाता है।
वासुदेव जी ने देखा कि उनके सम्मुख एक अद्भुत बालक है। उसके नेत्र कमल के समान कोमल और विशाल हैं। चार हाथों में शंख, गदा, चक्र और कमल धारण कर रखा है। वक्षस्थल पर श्रीवत्स का चिह्न अंकित है। गले में कौस्तुभमणि झिलमिला रही है।
सबरीमाला मंदिर बेहद खूबसूरत है। कहा जाता है कि यह मंदिर 18 पहाडि़यों के बीच स्थित है और मंदिर के प्रांगण में पहुंचने के लिए भी 18 सीढि़यां पार करनी पड़ती हैं। सबरीमाला मंदिर में अयप्पा के अलावा मालिकापुरत्त अम्मा, गणेश और नागराजा जैसे देवताओं की भी मूर्तियां बनी हुई हैं।
18वीं सदी में आज जिस जगह मंदिर स्थित है तब वहाँ पर अरावली श्रृंखला की हरी-भरी पहाड़ियां हुआ करती थी घने वन व कलकल करते चश्मे बहते थे। अनेको पशु-पक्षियों का बसेरा हुआ करता था इस वन की सुंदरता व शांत वातावरण के कारण लोग यहाँ सैर करने आते थे।
अनंत चतुर्दशी के दिन भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की आराधना होती है। भादो महीने की शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी को अनंत चततुर्दशी कहा जाता है। ऐसी मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने और अनंत सूत्र बांधने से सभी समस्याओं से मुक्ति मिलती है।
भाद्रपद मास की अमावस्या तिथि को मनाया जाने वाला यह पोला त्योहार, खरीफ फसल के द्वितीय चरण का कार्य (निंदाई गुड़ाई) पूरा हो जाने म नाते हैं। फसलों के बढ़ने की खुशी में किसानों द्वारा बैलों की पूजन कर कृतज्ञता दर्शाने के लिए भी यह पर्व मनाया जाता है।