॥ धर्म चर्चा ॥

nirvana shatakam
॥ धर्म चर्चा ॥, ॥ मंत्र एवं आरती ॥

निर्वाण षट्कम्: शुद्ध आत्मा की पुकार

“निर्वाण षट्कम्” (Nirvana Shatakam), जिसे “आत्म षट्कम्” भी कहा जाता है, महान अद्वैत वेदांत गुरु आदि शंकराचार्य द्वारा रचित एक अत्यंत गूढ़ और आध्यात्मिक ग्रंथ है। इस रचना में आत्मा और ब्रह्म के अद्वैत स्वरूप का वर्णन किया गया है। यह केवल छह श्लोकों की छोटी-सी कविता है, लेकिन इसकी गहराई में सम्पूर्ण वेदांत समाया हुआ है।

Astadasha Maha Shakti Peethas
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अष्टादश महाशक्ति पीठ

जहाँ ५१ शक्तिपीठ माँ सती के शरीर के अंगों के पृथ्वी पर गिरने से उत्पन्न हुए थे, वहीं अष्टादश महाशक्ति पीठ (18 Maha Shakti Peethas) उन विशिष्ट स्थलों को कहा गया है, जिनका उल्लेख स्वयं आदि शंकराचार्य और विभिन्न पुराणों में हुआ है। ये वे प्रमुख शक्तिपीठ हैं जो धार्मिक, आध्यात्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण माने गए हैं।

lord-Ram
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मूर्ति, प्रतिमा या विग्रह? जानिए देवी-देवताओं से जुड़ी मंदिर वास्तु और विज्ञान की गहराई

हमारे मंदिरों में जो दिव्य स्वरूप विराजमान हैं — उन्हें कभी मूर्ति, कभी प्रतिमा, तो कभी विग्रह कहा जाता है। लेकिन क्या ये तीनों शब्द एक ही चीज़ के लिए हैं?

उत्तर है — नहीं।

इनके पीछे गहरे दार्शनिक, धार्मिक और वैज्ञानिक अर्थ छिपे हैं, जिन्हें समझना भारत की प्राचीन ज्ञान परंपरा की यात्रा जैसा है।

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उनचास मरुत: सुंदरकांड में छिपा वह रहस्य जिससे आज का विज्ञान भी अनभिज्ञ है

गोस्वामी तुलसीदास द्वारा रचित रामचरितमानस के सुंदरकांड के 25वें दोहे में एक गूढ़ रहस्य छिपा है, जिसे जानकर न सिर्फ आध्यात्मिक जिज्ञासा शांत होती है, बल्कि आधुनिक मौसम विज्ञान भी हैरान रह सकता है।

Hanuman Ji
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हनुमान जी की मूर्ति पर आखिर क्यों लगाते हैं सिंदूर

लाल देह लाली लसे अरुधर लाल लंगूर।
बज्र देव दांव दलन जय जय जय कपिसूर।।

अर्थ- लाल रंग का सिंदूर लगाते हैं, देह जिनकी लाल हैं और लंबी सी पूंछ हैं। वज्र के समान बलवान शरीर हैं जो राक्षसों का संहार करते हैं। ऐसे श्री कपि को बार-बार प्रणाम।

Ganesh JI
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सर्वप्रथम गणेशजी की ही पूजा क्यों की जाती है ?

हिंदी में एक मुहावरा है: श्री गणेश करना जिसका अर्थ है किसी भी कार्य का शुभारम्भ। तो आइये फिर जानते हैं की क्या कारण है की ब्रह्मा, शिव, विष्णु और अन्य कई दिग्गज भगवानों की बजाय सर्वप्रथम पूजा गणपति की ही क्यों होती है।

श्रीराम की वानर सेना |
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श्रीराम की वानर सेना

रावण के गुप्तचर ने 18,00,00,00,00,00,00,000 तो सेनापतियों की संख्या बताया था, इसके अलावा असंख्य बंदर थे। ये सब वानर बल में सुग्रीव के समान हैं और इनके जैसे करोड़ों हैं, श्री रामजी की कृपा से उनमें अतुलनीय बल है। वे तीनों लोकों को तृण के समान समझते हैं

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रामचरित मानस के कुछ रोचक तथ्य

हर हिन्दू परिवार में रामचरित मानस की एक प्रति जरूर रहती है । हम बचपन से ही रामायण एवं राम चरित मानस का पथ करते आएं हैं । यहाँ रामचरितमानस में कुछ रोचक तथ्यों को संगृहीत किया गया है । 

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नवरात्र पर उपवास रखे जाने का महत्व

कुछ लोग पहले दिन और अष्टमी के दिन उपवास रखते हैं तो वहीं नवरात्र में कुछ लोग पूरे 9 दिन का उपवास करके मां दुर्गा की आराधना करते हैं। नवरात्र में उपवास रखने का विशेष महत्व है। देवी पूजा के साथ व्रत करके माता से मनोवांछित फलों की प्राप्ति होती है।

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