गरुड़ भगवान् विष्णु के वाहन कैसे बने?
ये कथा है पक्षी राज गरुड़ की। उनका जन्म कैसे हुआ ? उन्होंने देवताओं से अमृत कलश क्यों छीना? फिर भी इन्द्र उनके मित्र क्यों बन गए ? वे विष्णु जी के वाहन कैसे बने ?
ये कथा है पक्षी राज गरुड़ की। उनका जन्म कैसे हुआ ? उन्होंने देवताओं से अमृत कलश क्यों छीना? फिर भी इन्द्र उनके मित्र क्यों बन गए ? वे विष्णु जी के वाहन कैसे बने ?
एकदंति हाथी के सर के कारन ही गणेश जी भी एकदन्त कहलाये।
हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद माह की शुक्ल पक्ष चतुर्थी को भगवान गणेश का जन्म हुआ था।
उनके जन्मदिवस को ही गणेश चतुर्थी कहा जाता है।
नवरात्रि की शुरुआत की कुछ कथाओं में से एक ये हैं की सबसे पहले भगवान राम ने शरद ऋतू नवरात्रि की पूजा लंका में विजय प्राप्त करने के लिए की थी भगवान राम ने नौ दिनों तक उपासना करने के बाद दसवें दिन लंका पर चढ़ाई करके विजय को प्राप्त किया था ।
चतुर्दशी तिथि आरंभ (15 सितंबर)- 11 बजकर 1 मिनट से।
चतुर्दशी तिथि समाप्त (16 सितंबर)- 7 बजकर 56 मिनट तक।
पूजा का शुभ मुहूर्त- 16 सितंबर- सुबह 10 बजकर 9 मिनट से 11 बजकर 37 मिनट तक।
यह प्राचीन मंदिर ग्वालियर के करहिया क्षेत्र के जंगलों में स्थित है जो प्राकृतिक गुफाओं से परिपूर्ण है। लोक मान्यता के अनुसार यहां वह गुफा भी है जो रामायण काल में राम और रावण में हुए युद्ध की गाथा सुनाती हैं। आज भी मंदिर परिसर में अनवरत जल की धारा बहती है जो एक कुंड में पहुंचती हैं। यहां प्राचीन सात मंजिला इमारत बनी हुई है जिसे सतखंडा नाम से जाना जाता है।
बिना विवाह करे हुए वे पिता कैसे बने इसके पीछे एक बहुत ही रोचक कथा है। कुछ विद्वानों के अनुसार वाल्मीकि रामायण और रामचरित मानस, दोनों में मकरध्वज का कहीं उल्लेख नहीं है।
पान का आगे का भाग और तने वाला भाग में लक्ष्मी जी का वास होता है। यही कारण है कि पनबाड़ी (पान बेचने वाले) अपने यहां पान के आगे व पीछे का हिस्सा काटकर रख लेते हैं।
इस दिन माताएं अपनी संतान को कष्टों से बचाने और लंबी आयु की कामना के लिए निर्जला व्रत रखती हैं। जीवित्पुत्रिका व्रत को कुछ जगहों पर जितिया या जिउतिया व्रत के नाम से भी जानते हैं।
महृर्षि वेदव्यास ने 18 पुराणों का संस्कृत भाषा में संकलन किया है। ब्रह्मा, विष्णु तथा महेश उन पुराणों के मुख्य देव हैं। त्रिमूर्ति के प्रत्येक भगवान स्वरूप को छः पुराण समर्पित किये गये हैं। आइए जानते है 18 पुराणों के बारे में।
दक्षिण भारत का एक अति दुर्लभ ग्रन्थ ऐसा भी है जो हमारे सनातन धर्म कि अमूल्य धरोहर है । क्या ऐसा संभव है कि जब आप किताब को सीधा पढ़े तो राम कथा के रूप में पढ़ी जाती है और जब उसी किताब में लिखे शब्दों को उल्टा करके पढ़े तो कृष्ण कथा के रूप में होती है। इस ग्रंथ का नाम है राघवयादवीयम्। जाने इस अद्भुत कृति के बारे में।