॥ श्री रामचरितमानस ॥

कैकेयी का कोपभवन में जाना
॥ श्री रामचरितमानस ॥

कैकेयी का कोपभवन में जाना

दोहा : बड़ कुघातु करि पातकिनि कहेसि कोपगृहँ जाहु। काजु सँवारेहु सजग सबु सहसा जनि पतिआहु॥22॥॥ पापिनी मन्थरा ने बड़ी […]

सरस्वती का मन्थरा की बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा संवाद, प्रजा में खुशी
॥ श्री रामचरितमानस ॥

सरस्वती का मन्थरा की बुद्धि फेरना, कैकेयी-मन्थरा संवाद, प्रजा में खुशी

दोहा : नामु मंथरा मंदमति चेरी कैकइ केरि। अजस पेटारी ताहि करि गई गिरा मति फेरि॥12॥ मन्थरा नाम की कैकेई

राम राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की व्याकुलता तथा सरस्वती से उनकी प्रार्थना
॥ श्री रामचरितमानस ॥

राम राज्याभिषेक की तैयारी, देवताओं की व्याकुलता तथा सरस्वती से उनकी प्रार्थना

दोहा: सब कें उर अभिलाषु अस कहहिं मनाइ महेसु। आप अछत जुबराज पद रामहि देउ नरेसु॥1॥ सबके हृदय में ऐसी

1-मंगलाचरण
॥ श्री रामचरितमानस ॥

मंगलाचरण

द्वितीय सोपान – मंगलाचरण यस्यांके च विभाति भूधरसुता देवापगा मस्तके भाले बालविधुर्गले च गरलं यस्योरसि व्यालराट्। सोऽयं भूतिविभूषणः सुरवरः सर्वाधिपः

श्री रामचरित्‌ सुनने-गाने की महिमा
॥ श्री रामचरितमानस ॥

श्री रामचरित्‌ सुनने-गाने की महिमा

दोहा : राम रूपु भूपति भगति ब्याहु उछाहु अनंदु। जात सराहत मनहिं मन मुदित गाधिकुलचंदु॥360॥ गाधिकुल के चन्द्रमा विश्वामित्रजी बड़े

बारात का अयोध्या लौटना और अयोध्या में आनंद
॥ श्री रामचरितमानस ॥

बारात का अयोध्या लौटना और अयोध्या में आनंद

चली बरात निसान बजाई। मुदित छोट बड़ सब समुदाई॥ रामहि निरखि ग्राम नर नारी। पाइ नयन फलु होहिं सुखारी॥4॥ डंका

दशरथजी के पास जनकजी का दूत भेजना, अयोध्या से बारात का प्रस्थान
॥ श्री रामचरितमानस ॥

दशरथजी के पास जनकजी का दूत भेजना, अयोध्या से बारात का प्रस्थान

दोहा : तदपि जाइ तुम्ह करहु अब जथा बंस ब्यवहारु। बूझि बिप्र कुलबृद्ध गुर बेद बिदित आचारु॥286॥ तथापि तुम जाकर

श्री राम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद
॥ श्री रामचरितमानस ॥

श्री राम-लक्ष्मण और परशुराम-संवाद

चौपाई : नाथ संभुधनु भंजनिहारा। होइहि केउ एक दास तुम्हारा॥ आयसु काह कहिअ किन मोही। सुनि रिसाइ बोले मुनि कोही॥1॥

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