॥ श्री रामचरितमानस ॥

रामायणजी की आरती
॥ मंत्र एवं आरती ॥, ॥ श्री रामचरितमानस ॥

रामायणजी की आरती

आरती श्रीरामायणजी की। कीरति कलित ललित सिय पी की।। गावत ब्रह्मादिक मुनि नारद। बालमीक बिग्यान बिसारद।। सुक सनकादि सेष अरु […]

रामायण माहात्म्य, तुलसी विनय और फलस्तुति
॥ श्री रामचरितमानस ॥

रामायण माहात्म्य, तुलसी विनय और फलस्तुति

पूँछिहु राम कथा अति पावनि। सुक सनकादि संभु मन भावनि॥ सत संगति दुर्लभ संसारा। निमिष दंड भरि एकउ बारा॥3॥ जो

garudajee-ke-saat-prashna-uttar-kaand
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गरुड़जी के सात प्रश्न तथा काकभुशुण्डि के उत्तर

चौपाई : पुनि सप्रेम बोलेउ खगराऊ। जौं कृपाल मोहि ऊपर भाऊ॥। नाथ मोहि निज सेवक जानी। सप्त प्रस्न मम कहहु

ज्ञान-भक्ति-निरुपण, ज्ञान-दीपक और भक्ति की महान्‌ महिमा
॥ श्री रामचरितमानस ॥

ज्ञान-भक्ति-निरुपण, ज्ञान-दीपक और भक्ति की महान्‌ महिमा

भगति पच्छ हठ करि रहेउँ दीन्हि महारिषि साप। मुनि दुर्लभ बर पायउँ देखहु भजन प्रताप॥114 ख॥ मैं हठ करके भक्ति

काकभुशुण्डिजी का लोमशजी के पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना
॥ श्री रामचरितमानस ॥

काकभुशुण्डिजी का लोमशजी के पास जाना और शाप तथा अनुग्रह पाना

दोहा : गुर के बचन सुरति करि राम चरन मनु लाग। रघुपति जस गावत फिरउँ छन छन नव अनुराग॥110 क॥

गुरुजी का शिवजी से अपराध क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डि की आगे की कथा
॥ श्री रामचरितमानस ॥

गुरुजी का शिवजी से अपराध क्षमापन, शापानुग्रह और काकभुशुण्डि की आगे की कथा

दोहा : सुनि बिनती सर्बग्य सिव देखि बिप्र अनुरागु। पुनि मंदिर नभबानी भइ द्विजबर बर मागु॥108 क॥ सर्वज्ञ शिवजी ने

गुरुजी का अपमान एवं शिवजी के शाप की बात सुनना
॥ श्री रामचरितमानस ॥

गुरुजी का अपमान एवं शिवजी के शाप की बात सुनना

सोरठा : गुर नित मोहि प्रबोध दुखित देखि आचरन मम। मोहि उपजइ अति क्रोध दंभिहि नीति कि भावई॥105 ख॥ गुरुजी

काकभुशुण्डि का अपनी पूर्व जन्म कथा और कलि महिमा कहना
॥ श्री रामचरितमानस ॥

काकभुशुण्डि का अपनी पूर्व जन्म कथा और कलि महिमा कहना

चौपाई : सुनु खगेस रघुपति प्रभुताई। कहउँ जथामति कथा सुहाई।। जेहि बिधि मोह भयउ प्रभु मोही। सोउ सब कथा सुनावउँ

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