॥ श्री रामचरितमानस ॥

श्री राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र का जनकपुर में प्रवेश
॥ श्री रामचरितमानस ॥

श्री राम-लक्ष्मण सहित विश्वामित्र का जनकपुर में प्रवेश

चौपाई :: चले राम लछिमन मुनि संगा। गए जहाँ जग पावनि गंगा॥ गाधिसूनु सब कथा सुनाई। जेहि प्रकार सुरसरि महि […]

विश्वामित्र का राजा दशरथ से राम-लक्ष्मण को माँगना, ताड़का वध
॥ श्री रामचरितमानस ॥

विश्वामित्र का राजा दशरथ से राम-लक्ष्मण को माँगना, ताड़का वध

दोहा : ब्यापक अकल अनीह अज निर्गुन नाम न रूप। भगत हेतु नाना बिधि करत चरित्र अनूप॥205॥ जो व्यापक, अकल

पृथ्वी और देवतादि की करुण पुकार
॥ श्री रामचरितमानस ॥

पृथ्वी और देवतादि की करुण पुकार

चौपाई :: बाढ़े खल बहु चोर जुआरा। जे लंपट परधन परदारा॥ मानहिं मातु पिता नहिं देवा। साधुन्ह सन करवावहिं सेवा॥1॥

रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार
॥ श्री रामचरितमानस ॥

रावणादिका जन्म, तपस्या और उनका ऐश्वर्य तथा अत्याचार

दोहा : भरद्वाज सुनु जाहि जब होई बिधाता बाम। धूरि मेरुसम जनक जम ताहि ब्यालसम दाम॥175॥ (याज्ञवल्क्यजी कहते हैं-) हे

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