॥ श्री रामचरितमानस ॥

विश्वमोहिनी का स्वयंवर, शिवगणों को तथा भगवान्‌ को शाप और नारद का मोहभंग
॥ श्री रामचरितमानस ॥

विश्वमोहिनी का स्वयंवर, शिवगणों को तथा भगवान्‌ को शाप और नारद का मोहभंग

दोहा : आनि देखाई नारदहि भूपति राजकुमारि। कहहु नाथ गुन दोष सब एहि के हृदयँ बिचारि॥130॥ (फिर) राजा ने राजकुमारी

शिवजी की विचित्र बारात और विवाह की तैयारी
॥ श्री रामचरितमानस ॥

शिवजी की विचित्र बारात और विवाह की तैयारी

दोहा : लगे सँवारन सकल सुर बाहन बिबिध बिमान। होहिं सगुन मंगल सुभद करहिं अपछरा गान॥91॥ सब देवता अपने भाँति-भाँति

॥ श्री रामचरितमानस ॥

देवताओं का शिवजी से ब्याह के लिए प्रार्थना करना, सप्तर्षियों का पार्वती के पास जाना

दोहा : सकल सुरन्ह के हृदयँ अस संकर परम उछाहु। निज नयनन्हि देखा चहहिं नाथ तुम्हार बिबाहु॥88॥ हे शंकर! सब

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