॥ श्री रामचरितमानस ॥

शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ मोह, गरुड़जी का काकभुशुण्डि से रामकथा और राम महिमा सुनना
॥ श्री रामचरितमानस ॥

शिव-पार्वती संवाद, गरुड़ मोह, गरुड़जी का काकभुशुण्डि से रामकथा और राम महिमा सुनना

चौपाई : गिरिजा सुनहु बिसद यह कथा। मैं सब कही मोरि मति जथा॥ राम चरित सत कोटि अपारा। श्रुति सारदा […]

नारदजी का आना और स्तुति करके ब्रह्मलोक को लौट जाना
॥ श्री रामचरितमानस ॥

नारदजी का आना और स्तुति करके ब्रह्मलोक को लौट जाना

दोहा : तेहिं अवसर मुनि नारद आए करतल बीन। गावन लगे राम कल कीरति सदा नबीन॥50॥ उसी अवसर पर नारदमुनि

श्री राम-वशिष्ठ संवाद, श्री रामजी का भाइयों सहित अमराई में जाना
॥ श्री रामचरितमानस ॥

श्री राम-वशिष्ठ संवाद, श्री रामजी का भाइयों सहित अमराई में जाना

चौपाई : एक बार बसिष्ट मुनि आए। जहाँ राम सुखधाम सुहाए॥ अति आदर रघुनायक कीन्हा। पद पखारि पादोदक लीन्हा॥1॥ एक

श्री रामजी का प्रजा को उपदेश (श्री रामगीता), पुरवासियों की कृतज्ञता
॥ श्री रामचरितमानस ॥

श्री रामजी का प्रजा को उपदेश (श्री रामगीता), पुरवासियों की कृतज्ञता

चौपाई : एक बार रघुनाथ बोलाए। गुर द्विज पुरबासी सब आए॥ बैठे गुर मुनि अरु द्विज सज्जन। बोले बचन भगत

हनुमान्‌जी के द्वारा भरतजी का प्रश्न और श्री रामजी का उपदेश
॥ श्री रामचरितमानस ॥

हनुमान्‌जी के द्वारा भरतजी का प्रश्न और श्री रामजी का उपदेश

सुनी चहहिं प्रभु मुख कै बानी। जो सुनि होइ सकल भ्रम हानी॥ अंतरजामी प्रभु सभ जाना। बूझत कहहु काह हनुमाना॥2॥

पुत्रोत्पति, अयोध्याजी की रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद
॥ श्री रामचरितमानस ॥

पुत्रोत्पति, अयोध्याजी की रमणीयता, सनकादिका आगमन और संवाद

दोहा : ग्यान गिरा गोतीत अज माया मन गुन पार। सोइ सच्चिदानंद घन कर नर चरित उदार॥25॥ जो (बौद्धिक) ज्ञान,

राम राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति
॥ श्री रामचरितमानस ॥

राम राज्याभिषेक, वेदस्तुति, शिवस्तुति

चौपाई : अवधपुरी अति रुचिर बनाई। देवन्ह सुमन बृष्टि झरि लाई॥ राम कहा सेवकन्ह बुलाई। प्रथम सखन्ह अन्हवावहु जाई॥1॥ अवधपुरी

श्री रामजी का स्वागत, भरत मिलाप, सबका मिलनानन्द
॥ श्री रामचरितमानस ॥

श्री रामजी का स्वागत, भरत मिलाप, सबका मिलनानन्द

दोहा : आवत देखि लोग सब कृपासिंधु भगवान। नगर निकट प्रभु प्रेरेउ उतरेउ भूमि बिमान॥4 क॥ कृपा सागर भगवान्‌ श्री

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