॥ श्री रामचरितमानस ॥

रावण-हनुमान्‌ युद्ध, रावण का माया रचना, रामजी द्वारा माया नाश
॥ श्री रामचरितमानस ॥

रावण-हनुमान्‌ युद्ध, रावण का माया रचना, रामजी द्वारा माया नाश

चौपाई : देखा श्रमित बिभीषनु भारी। धायउ हनूमान गिरि धारी॥ रथ तुरंग सारथी निपाता। हृदय माझ तेहि मारेसि लाता॥1॥ विभीषण

रावण का विभीषण पर शक्ति छोड़ना, रामजी का शक्ति को अपने ऊपर लेना, विभीषण-रावण युद्ध
॥ श्री रामचरितमानस ॥

रावण का विभीषण पर शक्ति छोड़ना, रामजी का शक्ति को अपने ऊपर लेना, विभीषण-रावण युद्ध

दोहा : पुनि दसकंठ क्रुद्ध होइ छाँड़ी सक्ति प्रचंड। चली बिभीषन सन्मुख मनहुँ काल कर दंड॥93॥ फिर रावण ने क्रोधित

इंद्र का श्री रामजी के लिए रथ भेजना, राम-रावण युद्ध
॥ श्री रामचरितमानस ॥

इंद्र का श्री रामजी के लिए रथ भेजना, राम-रावण युद्ध

चौपाई : देवन्ह प्रभुहि पयादें देखा। उपजा उर अति छोभ बिसेषा॥ सुरपति निज रथ तुरत पठावा। हरष सहित मातलि लै

रावण मूर्च्छा, रावण यज्ञ विध्वंस, राम-रावण युद्ध
॥ श्री रामचरितमानस ॥

रावण मूर्च्छा, रावण यज्ञ विध्वंस, राम-रावण युद्ध

दोहा : देखि पवनसुत धायउ बोलत बचन कठोर। आवत कपिहि हन्यो तेहिं मुष्टि प्रहार प्रघोर॥83॥ यह देखकर पवनपुत्र हनुमान्‌जी कठोर

रावण का युद्ध के लिए प्रस्थान और श्री रामजी का विजयरथ तथा वानर-राक्षसों का युद्ध
॥ श्री रामचरितमानस ॥

रावण का युद्ध के लिए प्रस्थान और श्री रामजी का विजयरथ तथा वानर-राक्षसों का युद्ध

दोहा : ताहि कि संपति सगुन सुभ सपनेहुँ मन बिश्राम। भूत द्रोह रत मोहबस राम बिमुख रति काम॥78॥ जो जीवों

मेघनाद यज्ञ विध्वंस, युद्ध और मेघनाद उद्धार
॥ श्री रामचरितमानस ॥

मेघनाद यज्ञ विध्वंस, युद्ध और मेघनाद उद्धार

चौपाई : मेघनाद कै मुरछा जागी। पितहि बिलोकि लाज अति लागी॥ तुरत गयउ गिरिबर कंदरा। करौं अजय मख अस मन

मेघनाद का युद्ध, रामजी का लीला से नागपाश में बँधना
॥ श्री रामचरितमानस ॥

मेघनाद का युद्ध, रामजी का लीला से नागपाश में बँधना

दोहा : मेघनाद मायामय रथ चढ़ि गयउ अकास। गर्जेउ अट्टहास करि भइ कपि कटकहि त्रास॥72॥ मेघनाद उसी (पूर्वोक्त) मायामय रथ

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