॥ श्री रामचरितमानस ॥

कुम्भकर्ण युद्ध और उसकी परमगति
॥ श्री रामचरितमानस ॥

कुम्भकर्ण युद्ध और उसकी परमगति

चौपाई : बंधु बचन सुनि चला बिभीषन। आयउ जहँ त्रैलोक बिभूषन॥ नाथ भूधराकार सरीरा। कुंभकरन आवत रनधीरा॥1॥॥ भाई के वचन […]

रावण का कुम्भकर्ण को जगाना, कुम्भकर्ण का रावण को उपदेश और विभीषण-कुम्भकर्ण संवाद
॥ श्री रामचरितमानस ॥

रावण का कुम्भकर्ण को जगाना, कुम्भकर्ण का रावण को उपदेश और विभीषण-कुम्भकर्ण संवाद

चौपाई : यह बृत्तांत दसानन सुनेऊ। अति बिषाद पुनि पुनि सिर धुनेऊ॥ ब्याकुल कुंभकरन पहिं आवा। बिबिध जतन करि ताहि

श्री रामजी की प्रलापलीला, हनुमान्‌जी का लौटना, लक्ष्मणजी का उठ बैठना
॥ श्री रामचरितमानस ॥

श्री रामजी की प्रलापलीला, हनुमान्‌जी का लौटना, लक्ष्मणजी का उठ बैठना

चौपाई : उहाँ राम लछिमनहि निहारी। बोले बचन मनुज अनुसारी॥ अर्ध राति गइ कपि नहिं आयउ। राम उठाइ अनुज उर

भरतजी के बाण से हनुमान्‌ का मूर्च्छित होना, भरत-हनुमान्‌ संवाद
॥ श्री रामचरितमानस ॥

भरतजी के बाण से हनुमान्‌ का मूर्च्छित होना, भरत-हनुमान्‌ संवाद

दोहा : देखा भरत बिसाल अति निसिचर मन अनुमानि। बिनु फर सायक मारेउ चाप श्रवन लगि तानि॥58॥ भरतजी ने आकाश

हनुमानजी का सुषेण वैद्य को लाना एवं संजीवनी के लिए जाना, कालनेमि-रावण संवाद, मकरी उद्धार, कालनेमि उद्धार
॥ श्री रामचरितमानस ॥

हनुमानजी का सुषेण वैद्य को लाना एवं संजीवनी के लिए जाना, कालनेमि-रावण संवाद, मकरी उद्धार, कालनेमि उद्धार

जामवंत कह बैद सुषेना। लंकाँ रहइ को पठई लेना॥ धरि लघु रूप गयउ हनुमंता। आनेउ भवन समेत तुरंता॥4॥ जाम्बवान्‌ ने

लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, लक्ष्मणजी को शक्ति लगना
॥ श्री रामचरितमानस ॥

लक्ष्मण-मेघनाद युद्ध, लक्ष्मणजी को शक्ति लगना

कालरूप खल बन दहन गुनागार घनबोध। सिव बिरंचि जेहि सेवहिं तासों कवन बिरोध॥48 ख॥ जो कालस्वरूप हैं, दुष्टों के समूह

अंगद-राम संवाद, युद्ध की तैयारी
॥ श्री रामचरितमानस ॥

अंगद-राम संवाद, युद्ध की तैयारी

इहाँ राम अंगदहि बोलावा। आइ चरन पंकज सिरु नावा॥ अति आदर समीप बैठारी। बोले बिहँसि कृपाल खरारी॥2॥ यहाँ (सुबेल पर्वत

रावण को पुनः मन्दोदरी का समझाना
॥ श्री रामचरितमानस ॥

रावण को पुनः मन्दोदरी का समझाना

साँझ जानि दसकंधर भवन गयउ बिलखाइ। मंदोदरीं रावनहिं बहुरि कहा समुझाइ॥35 ख॥ सन्ध्या हो गई जानकर दशग्रीव बिलखता हुआ (उदास

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